नई दिल्ली। भारत में चाय सिर्फ एक पेय पदार्थ नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है। सुबह की शुरुआत हो या दोस्तों के साथ बातचीत का दौर, चाय की चुस्की भारतीय संस्कृति में एक खास जगह रखती है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि भारतीय हमेशा से चाय के शौकीन नहीं थे। चाय का सफर चीन से शुरू हुआ और अंग्रेजों के दौर में यह भारत पहुंचकर धीरे-धीरे हर घर की पसंद बन गई
चाय का इतिहास करीब 5 हजार साल पुराना माना जाता है। एक प्रसिद्ध कहानी के अनुसार, चाय की खोज चीन के राजा शेन नुंग के समय हुई थी। कहा जाता है कि करीब 2737 ईसा पूर्व राजा शेन नुंग एक पेड़ के नीचे बैठे थे और उनके सेवक पानी उबाल रहे थे। तभी हवा के झोंके से पेड़ की कुछ पत्तियां उबलते पानी में गिर गईं। जब राजा ने उस पानी को पिया तो उन्हें उसका स्वाद और ताजगी पसंद आई। इसी घटना को चाय की शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है।
समय के साथ चाय चीन से निकलकर दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंची। भारत में चाय का प्रवेश मुख्य रूप से अंग्रेजों के समय हुआ। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने चीन से चाय के व्यापार पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए भारत में चाय की खेती शुरू करवाई। असम और दार्जिलिंग जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर चाय के बागान विकसित किए गए। शुरुआती दौर में चाय का सेवन भारत में आम लोगों के बीच ज्यादा लोकप्रिय नहीं था। अंग्रेजों और कुछ उच्च वर्ग के लोगों तक ही इसका इस्तेमाल सीमित था। बाद में ब्रिटिश सरकार और चाय कंपनियों ने इसे आम जनता तक पहुंचाने के लिए कई प्रयास किए।
बताया जाता है कि रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक स्थानों पर चाय का प्रचार किया गया। यात्रियों को चाय पिलाई गई ताकि लोग इसके स्वाद के आदी हो सकें। धीरे-धीरे चाय भारतीयों की रोजमर्रा की आदत का हिस्सा बन गई। रेलवे के विस्तार के साथ चाय छोटे-बड़े शहरों और गांवों तक पहुंच गई। समय के साथ भारतीयों ने चाय को अपने स्वाद और संस्कृति के हिसाब से बदल लिया। जहां अंग्रेजों के समय चाय को साधारण तरीके से पिया जाता था, वहीं भारत में इसमें दूध, चीनी, अदरक, इलायची, तुलसी और कई अन्य मसालों को मिलाकर अलग-अलग स्वाद तैयार किए गए। यही वजह है कि भारतीय मसाला चाय आज पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।
भारत में चाय की कई किस्में लोकप्रिय हैं। असम की कड़क चाय, दार्जिलिंग की सुगंधित चाय और देश के अलग-अलग हिस्सों में मिलने वाली स्थानीय चाय की अपनी खास पहचान है। सड़क किनारे मिलने वाली कुल्हड़ चाय से लेकर घरों में बनने वाली अदरक वाली चाय तक, हर रूप में चाय भारतीयों के दिल के करीब है। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े चाय उत्पादक देशों में शामिल है। चाय न केवल लोगों की पसंदीदा ड्रिंक है, बल्कि लाखों लोगों की आजीविका का माध्यम भी है। चाय की खेती, उत्पादन और बिक्री से बड़ी संख्या में लोग जुड़े हुए हैं। चीन के राजघरानों से शुरू हुआ चाय का सफर भारत में आकर एक अलग पहचान बना चुका है। अंग्रेजों की लाई हुई Tea आज भारतीय अंदाज की कड़क चाय बनकर देश के हर कोने में अपनी जगह बना चुकी है।


















