नेपाल आपदा में लापता लोगों का मृत्यु पंजीकरण होगा आसान, संशोधित होंगे दो कानून


विदेश 07 October 2026
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नेपाल आपदा में लापता लोगों का मृत्यु पंजीकरण होगा आसान, संशोधित होंगे दो कानून

काठमांडू, 06 अक्टूबर । नेपाल के भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्र में आई विनाशकारी आपदा में लापता नागरिकों की मृत्यु दर्ज कराने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सरकार दो कानूनों में संशोधन करने जा रही है। इसके लिए ‘फास्ट ट्रैक’ प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

गृह मंत्रालय के सचिव केदारनाथ शर्मा और कानून, न्याय तथा संसदीय मामलों के मंत्रालय के सहसचिव सुभाष भट्टराई ने भोटेकोशी-त्रिशूली आपदा संबंधी संसदीय विशेष समिति की सिंहदरबार में हुई बैठक में कहा कि मौजूदा कानूनी प्रक्रिया के कारण आपदा प्रभावित परिवारों को राहत और अन्य कानूनी सुविधाएं प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है। इसलिए कानून में संशोधन आवश्यक है।

उनके अनुसार, गृह मंत्रालय की ओर से भेजे गए आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा प्रबंधन अधिनियम और राष्ट्रीय परिचयपत्र तथा पंजीकरण अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को कानून मंत्रालय प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। भट्टराई ने कहा कि वर्तमान में लापता नागरिकों की मृत्यु की घोषणा और मृत्यु पंजीकरण के लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। इसलिए गृह मंत्रालय के समन्वय में संबंधित कानूनों में संशोधन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इसे आवश्यकता के अनुसार फास्ट ट्रैक से आगे बढ़ाने की तैयारी है।

भट्टराई ने बताया कि संसद का अधिवेशन नहीं होने की स्थिति में भी संशोधन प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के तरीकों पर चर्चा की जा रही है। उन्होंने कहा कि लापता नागरिकों की मृत्यु पंजीकरण की तत्काल समस्या के समाधान के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न आपदाओं के दीर्घकालीन प्रभावों से निपटने के लिए भी कानूनी सुधार आवश्यक हैं। उनके अनुसार पर्यावरण संरक्षण अधिनियम में संशोधन करने या आवश्यकता के अनुसार अलग से जलवायु परिवर्तन संबंधी कानून बनाने के मुद्दे पर वन तथा पर्यावरण मंत्रालय के साथ चर्चा की जाएगी।

मंत्रालय के अनुसार मौजूदा मुलुकी देवानी संहिता में मृत्यु की घोषणा और पंजीकरण की प्रक्रिया लंबी और जटिल है। इसके कारण लापता लोगों के परिवारों को राहत, मुआवजा और अन्य कानूनी सुविधाएं प्राप्त करने में परेशानी हो रही है। इसी तरह, जोखिम के आधार पर जमीन का वर्गीकरण और उसका उचित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए भू-उपयोग अधिनियम तथा बुनियादी ढांचे की सुरक्षा से संबंधित कानूनों में भी सुधार की आवश्यकता दिखाई दे रही है।

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