नई दिल्ली 20 मई: भारतीय क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाज़ और “रन मशीन” के नाम से मशहूर विराट कोहली ने स्वीकार किया है कि उनके करियर में एक ऐसा दौर भी आया, जब उन्हें मानसिक और पेशेवर रूप से काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि कप्तानी छोड़ने के बाद का समय उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण और तनावपूर्ण रहा। RCB इनोवेशन लैब इंडियन स्पोर्ट समिट के तीसरे संस्करण में बोलते हुए विराट कोहली ने अपने करियर के उस दौर पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि भारतीय टीम की कप्तानी छोड़ने के बाद उन्हें आत्मविश्वास और फॉर्म को लेकर संघर्ष करना पड़ा था।
कोहली ने कहा कि इस कठिन समय में भारतीय टीम के तत्कालीन मुख्य कोच राहुल द्रविड़ और बैटिंग कोच विक्रम राठौर ने उनका लगातार साथ दिया और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने स्वीकार किया कि इस दौर में उन्हें अपने खेल को लेकर काफी सोच-विचार करना पड़ा और खुद को फिर से उसी ऊर्जा और जुनून के साथ मैदान पर लाना आसान नहीं था, जिसके लिए वे जाने जाते हैं। आंकड़ों के अनुसार, 2022 में कप्तानी छोड़ने के बाद विराट कोहली ने टेस्ट क्रिकेट में छह मैचों में 265 रन बनाए थे, जिसमें उनका औसत 26.5 रहा और इस दौरान उनके बल्ले से केवल एक अर्धशतक निकला। यह आंकड़े उनके स्तर के खिलाड़ी के लिए अपेक्षाकृत कमजोर माने गए।
राहुल द्रविड़ और विक्रम राठौर ने इस दौरान कोहली के साथ लगातार काम किया और उनके आत्मविश्वास को दोबारा मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया। दोनों ने माना कि कोहली जैसे खिलाड़ी में वापसी की क्षमता हमेशा रहती है, बस सही मार्गदर्शन और समर्थन की जरूरत होती है। कोहली ने भी इस बात को स्वीकार किया कि द्रविड़ और राठौर के सहयोग से उन्हें अपने खेल के प्रति भूख और जुनून को फिर से खोजने में मदद मिली। उन्होंने कहा कि इस समर्थन ने उन्हें मानसिक रूप से स्थिर होने और फिर से अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की ओर लौटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुल मिलाकर, विराट कोहली का यह बयान उनके करियर के उस अहम दौर को उजागर करता है, जहां एक महान खिलाड़ी भी संघर्षों से गुजरता है, लेकिन सही मार्गदर्शन और आत्मविश्वास के साथ वापसी कर सकता है।



















