शिमला, 30 मई । हिमाचल प्रदेश कैडर की सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईएएस अधिकारी उपमा दादा चौधरी को मेट्रोपोलिटन स्टॉक एक्सचेंज (एमएसई) के गवर्निंग बोर्ड की चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। इस नियुक्ति के साथ ही वह भारत की मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (एमआईआई) में चेयरपर्सन का पद संभालने वाली एकमात्र महिला बन गई हैं। एमएसई देश के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों में शामिल है और पूंजी बाजार के विस्तार में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
35 वर्षों का प्रशासनिक अनुभव, एलबीएसएनएए की पहली महिला निदेशक रहीं
1983 बैच की हिमाचल प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी रहीं उपमा चौधरी ने अपने 35 वर्षों से अधिक लंबे प्रशासनिक करियर में केंद्र और राज्य सरकार में अनेक अहम जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने वित्त, ग्रामीण विकास, शिक्षा, उद्योग, पर्यटन, महिला सशक्तिकरण और सार्वजनिक क्षेत्र में सुधार जैसे विविध क्षेत्रों में काम किया। वर्ष 2016 में वह मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) की पहली महिला निदेशक बनीं। प्रशासनिक प्रशिक्षण के क्षेत्र में उनका यह कार्यकाल विशेष रूप से उल्लेखनीय माना जाता है। वह भारत सरकार में युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की सचिव रहीं और इसी पद से वर्ष 2019 में सेवानिवृत्त हुईं।
संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक मंचों पर भी निभाई अहम भूमिका
उपमा चौधरी का अनुभव केवल भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2018 से 2021 के बीच वह संयुक्त राष्ट्र की कमेटी ऑफ एक्सपर्ट्स ऑन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की सदस्य रहीं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र लोक सेवा पुरस्कारों से जुड़े कार्य समूह की अध्यक्षता भी की। सुशासन, प्रशासनिक सुधार और संस्थान निर्माण के क्षेत्र में उनके योगदान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।
डीसी से लेकर अतिरिक्त मुख्य सचिव तक संभालीं अहम जिम्मेदारियां, पति रह चुके हैं हिमाचल के मुख्य सचिव
उपमा चौधरी का हिमाचल प्रदेश से गहरा प्रशासनिक जुड़ाव रहा है। उन्होंने सोलन की उपायुक्त के रूप में सेवाएं दीं और राज्य सरकार में सचिव, प्रधान सचिव तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। प्रशासनिक हलकों में उन्हें नीतिगत फैसलों, प्रभावी नेतृत्व और सुशासन के लिए जाना जाता है। उनके पति विनीत चौधरी भी हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव रह चुके हैं।



















