काठमांडू, 08 सितंबर । पूर्व प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने कहा है कि जेन-जी आंदोलन ने राज्य और राजनीतिक नेतृत्व को स्पष्ट संदेश दिया है कि सुशासन के बिना संसद में दो-तिहाई बहुमत भी राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित नहीं कर सकता।
कार्की ने मंगलवार को जेन-जी आंदोलन की पहली वर्षगांठ के अवसर पर फेसबुक पर संदेश जारी करते हुए यह बात कही। उन्होंने काह कि राजनीतिक स्थिरता संसद के गणित से नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों के चरित्र और कार्यशैली से तय होती है। उन्होंने सरकार से प्रभावी ढंग से सुशासन सुनिश्चित करने, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण करने, कानून के शासन को कायम रखने और नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करने का आग्रह किया।
जेन-जी आंदोलन के दौरान हुई जन-धन की क्षति और उससे पैदा हुए दर्द को याद करते हुए कार्की ने सभी राजनीतिक शक्तियों और नागरिकों से जिम्मेदार और सतर्क रहने की अपील की, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। उन्होंने 8 सितंबर, 2025 को जेन-जी आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले युवाओं को श्रद्धांजलि दी और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। कार्की ने कहा कि आइए, एकजुट होकर इस आपदा का सामना करें, एक-दूसरे का सहयोग करें और अपने दुख पर करुणा का मरहम लगाएं।
कार्की ने कहा कि युवाओं ने सुशासन, जवाबदेही, पारदर्शिता और बेहतर भविष्य की मांग को लेकर सड़कों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों का रुख किया था। लेकिन उनकी आवाज को दबाने के प्रयास में कई निर्दोष युवाओं की जान चली गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान निजी और सार्वजनिक संपत्तियों के साथ-साथ राष्ट्रीय विरासत स्थलों को भी व्यापक नुकसान पहुंचा, जिसके घाव भरना आसान नहीं होगा।
कार्की ने जोर देकर कहा कि हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी, जिम्मेदारी और सतर्कता के साथ निभानी चाहिए, ताकि लोगों को दोबारा सुशासन और बदलाव की मांग को लेकर सड़कों पर उतरने की जरूरत न पड़े। उन्होंने कहा कि जेन-जी आंदोलन में भारी जन-धन की क्षति के एक वर्ष पूरा होने से पहले ही देश एक बार फिर दर्दनाक स्थिति का सामना कर रहा है। हाल की भोटेकोशी बाढ़ का उल्लेख करते हुए उन्होंने आपदा की इस घड़ी में धैर्य, जिम्मेदारी और एकजुटता बनाए रखने की अपील की।


















