भारत में रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए बड़े निवेश की जरूरत


व्यापार 28 September 2026
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भारत में रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए बड़े निवेश की जरूरत

भारत में तेजी से बढ़ती रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता को बिजली व्यवस्था में बेहतर तरीके से शामिल करने के लिए बड़े स्तर पर एनर्जी स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी। एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2032 (FY32) तक भारत को एनर्जी स्टोरेज से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की आवश्यकता पड़ सकती है।केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का पावर सेक्टर अब केवल बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने की चुनौती तक सीमित नहीं है, बल्कि रिन्यूएबल एनर्जी की बढ़ती हिस्सेदारी को ग्रिड सिस्टम में प्रभावी तरीके से जोड़ना भी एक बड़ी चुनौती बन गई है।

रिन्यूएबल एनर्जी बढ़ने से स्टोरेज की मांग बढ़ी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सौर और पवन ऊर्जा जैसे रिन्यूएबल स्रोतों की क्षमता लगातार बढ़ रही है। हालांकि इन स्रोतों से बिजली उत्पादन मौसम और समय पर निर्भर करता है। सौर ऊर्जा का उत्पादन दिन के समय अधिक होता है, जबकि बिजली की मांग कई बार अलग-अलग समय पर बढ़ती है।ऐसे में अतिरिक्त बिजली को स्टोर करके जरूरत के समय उपयोग करने के लिए बड़े पैमाने पर एनर्जी स्टोरेज सिस्टम की आवश्यकता होगी। इससे बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर और भरोसेमंद बनाया जा सकेगा।रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की एनर्जी स्टोरेज जरूरत FY32 तक करीब 411 गीगावॉट-ऑवर (GWh) तक पहुंच सकती है। वहीं, जून 2026 तक देश में ऑपरेशनल स्टोरेज क्षमता लगभग 54 GWh थी।

नॉन-फॉसिल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़ी केयरएज रेटिंग्स के अनुसार, भारत की कुल इंस्टॉल्ड पावर जेनरेशन कैपेसिटी में नॉन-फॉसिल फ्यूल आधारित ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।हालांकि, वास्तविक बिजली उत्पादन में इन स्रोतों का योगदान लगभग 29 प्रतिशत है। रिपोर्ट के मुताबिक, इंस्टॉल्ड क्षमता और वास्तविक उत्पादन के बीच यह अंतर रिन्यूएबल एनर्जी की प्रकृति के कारण है।सौर और पवन ऊर्जा लगातार उपलब्ध नहीं रहती, इसलिए इनके बेहतर इस्तेमाल के लिए स्टोरेज सिस्टम, मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क और फ्लेक्सिबल पावर जेनरेशन की जरूरत बढ़ रही है।

स्टोरेज सिस्टम पर होगा बड़ा खर्च रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि FY32 तक एनर्जी स्टोरेज की जरूरतों को पूरा करने के लिए 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) आवश्यक होगा।यह निवेश बैटरी स्टोरेज सिस्टम, पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज, ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य तकनीकों के विकास में किया जा सकता है।एनर्जी स्टोरेज सिस्टम बिजली उत्पादन और खपत के बीच संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे रिन्यूएबल स्रोतों से मिलने वाली बिजली को अधिक प्रभावी तरीके से उपयोग किया जा सकेगा।

बिजली सिस्टम में बदलाव की जरूरत भारत सरकार रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता बढ़ाने पर लगातार जोर दे रही है। देश में सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार हो रहा है, लेकिन इसके साथ बिजली ग्रिड को मजबूत बनाना भी जरूरी हो गया है।रिपोर्ट में कहा गया है कि जैसे-जैसे रिन्यूएबल एनर्जी का हिस्सा बढ़ेगा, वैसे-वैसे बिजली व्यवस्था को अधिक लचीला बनाने की आवश्यकता होगी।

इसके लिए स्टोरेज क्षमता, बेहतर ट्रांसमिशन नेटवर्क और आधुनिक तकनीक की जरूरत होगी। बिजली आपूर्ति को स्थिर बनाने में मिलेगी मदद एनर्जी स्टोरेज के बढ़ने से बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलेगी। जब रिन्यूएबल स्रोतों से अधिक बिजली उपलब्ध होगी, तब उसे स्टोर किया जा सकेगा और जरूरत के समय इस्तेमाल किया जा सकेगा।इससे बिजली कटौती की समस्या कम करने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने में सहायता मिल सकती है। भारत के ऊर्जा बदलाव में अहम भूमिका भारत का लक्ष्य स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना है। इस दिशा में रिन्यूएबल एनर्जी का विस्तार महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि, बढ़ती रिन्यूएबल क्षमता को सफल बनाने के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़े निवेश की जरूरत होगी। केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले वर्षों में एनर्जी स्टोरेज सेक्टर भारत के ऊर्जा बदलाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहा है।FY32 तक 411 GWh स्टोरेज जरूरत और 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक के संभावित निवेश का अनुमान इस बात का संकेत है कि भारत का पावर सेक्टर तेजी से एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां उत्पादन क्षमता के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण और प्रबंधन भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।

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