अम्बिकापुर, 01 अक्टूबर । छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के उदयपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत अलकापुरी जंगल में बुधवार रात करंट की चपेट में आने से एक नन्हे हाथी (शावक) की तड़प-तड़प कर मौत हो गई।
कक्ष क्रमांक पी-2027 के पास फसलों को बचाने के नाम पर करीब एक किलोमीटर के दायरे में अवैध रूप से बिछाए गए बिजली के 'झटका तार' में फंसने से यह दर्दनाक हादसा हुआ। शावक की सूंड और पैर करंट प्रवाहित तारों में उलझ गए, जिससे उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
इस हृदयविदारक हादसे के बाद दल में शामिल 27 हाथियों ने जब एक साथ चिंघाड़ना शुरू किया, तो पूरा अलकापुरी इलाका दहल उठा। अपने साथी बच्चे की मौत से बौखलाए हाथियों के झुंड की गूंज से ग्रामीणों की नींद उड़ गई और पूरी रात लोग भारी दहशत के साये में दुबके रहे। अलकापुरी और आसपास के जंगलों में यह दल पिछले कई महीनों से विचरण कर रहा था, बावजूद इसके खेतों के इर्द-गिर्द बिछाए गए जानलेवा तारों पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया जा सका, जिससे अब वन विभाग की सतर्कता और निगरानी तंत्र पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जिस जमीन के चारों ओर यह घातक तार बिछाया गया था, वह झिरमिटी सरपंच चंदन एक्का एवं उनके परिजनों की बताई जा रही है। हादसे की खबर मिलते ही उदयपुर थाना प्रभारी शिशिरकांत सिंह दलबल के साथ मौके पर पहुंचे, वहीं वन अमले और वरिष्ठ अधिकारियों की टीम ने भी घटनास्थल का मुआयना किया। शावक के शव का पोस्टमार्टम करने के लिए जिला मुख्यालय से तीन पशु चिकित्सकों का विशेष दल बुलाया गया है।
वन और पुलिस प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की बारीकी से जांच की जा रही है और अवैध रूप से बिजली प्रवाहित कर वन्यजीव की जान जोखिम में डालने वाले दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



















