पेट्रोल-डीजल पर सरकार का नया फैसला, आज से लागू हुईं निर्यात टैक्स की दरें


व्यापार 17 October 2026
post

पेट्रोल-डीजल पर सरकार का नया फैसला, आज से लागू हुईं निर्यात टैक्स की दरें

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला टैक्स पांच गुना बढ़ा दिया है, जबकि डीजल के निर्यात पर शुल्क करीब आधा कर दिया गया है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, नई दरें 16 अक्टूबर से लागू हुई हैं और अगले दो सप्ताह तक प्रभावी रहेंगी। इस फैसले का असर विदेश भेजे जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर पड़ेगा, घरेलू पेट्रोल पंपों पर कीमतें नहीं बदलेंगी। सरकार का उद्देश्य निर्यात और घरेलू सप्लाई के बीच संतुलन बनाए रखना है, ताकि देश में ईंधन की कमी न हो।

पेट्रोल के निर्यात पर टैक्स 5 गुना बढ़ा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल के निर्यात शुल्क में बदलाव किया है। सरकार ने पेट्रोल को विदेश भेजने पर लगने वाला टैक्स पांच गुना बढ़ा दिया है। वहीं, डीजल के निर्यात पर लगने वाली लेवी में करीब 50 प्रतिशत की कटौती की गई है। वित्त मंत्रालय ने नई दरें 16 अक्टूबर से लागू कर दी हैं। ये दरें अगले दो सप्ताह तक प्रभावी रहेंगी। सरकार हर 15 दिन में इन शुल्कों की समीक्षा करती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल तथा रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों को ध्यान में रखकर बदलाव करती है।

निर्यात शुल्क में किए गए बदलाव... निर्यात शुल्क में किए गए बदलाव का असर विदेश भेजे जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर होगा। आम उपभोक्ताओं को फिलहाल पेट्रोल पंपों पर कीमतों में किसी बदलाव का सामना नहीं करना पड़ेगा। सरकार ने घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम नहीं बदले हैं। इस फैसले के पीछे एक अहम वजह देश में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना है। सरकार चाहती है कि भारतीय रिफाइनरी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर मुनाफा मिलने पर घरेलू जरूरतों के लिए उपलब्ध ईंधन को बड़े पैमाने पर विदेश न भेजें। निर्यात शुल्क में बदलाव करके सरकार घरेलू आपूर्ति और कंपनियों के निर्यात के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती है।

दुनियाभर में कच्चे तेल के दाम ... दुनियाभर में कच्चे तेल के दाम कई घटनाओं से प्रभावित हो रहे हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसके अलावा समुद्री रास्तों पर सुरक्षा संबंधी घटनाओं ने भी तेल की आपूर्ति और परिवहन को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं। दूसरी ओर, अमेरिका की ओर से तेल की ढुलाई से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार करने और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की ओर से आपातकालीन भंडार जारी करने के संकेतों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में मामूली नरमी आई है।

रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का प्रशासन ईरान, रूस और वेनेजुएला से तेल ले जाने वाले टैंकरों को कुछ राहत देने की योजना पर विचार कर रहा है। हालांकि, इन संभावित कदमों के बावजूद पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के कारण तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट नहीं आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले .... अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा का भी असर पड़ रहा है। इस क्षेत्र में जहाजों पर हमलों की खबरों और सऊदी अरब तथा यमन के हूती विद्रोहियों के बीच जारी झड़पों ने आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं।

ऐसे हालात में तेल की कीमतों में तेजी और गिरावट का सीधा असर पेट्रोलियम कारोबार पर पड़ सकता है। इसी वजह से सरकार समय-समय पर निर्यात शुल्क की समीक्षा करती है, ताकि घरेलू जरूरतों के लिए ईंधन उपलब्ध रहे। क्या होता है विंडफॉल टैक्स? विंडफॉल टैक्स वह शुल्क है, जो कंपनियों को अचानक होने वाले असाधारण मुनाफे पर लगाया जाता है।

जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ जाती हैं, तो तेल कंपनियों को विदेशों में पेट्रोलियम उत्पाद बेचने से अधिक कमाई हो सकती है। ऐसी स्थिति में सरकार इस अतिरिक्त मुनाफे का कुछ हिस्सा टैक्स के रूप में हासिल करने और घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए शुल्क में बदलाव कर सकती है। पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर दरों में ताजा बदलाव भी इसी व्यवस्था के तहत किया गया है।

You might also like!




Advertisment