मप्र में संघ का महा-मंथन शुरू : संगठनात्मक ढांचे में बदलाव, डिजिटल चुनौतियों और वैश्विक संवाद समेत तमाम विषयों पर हो रहा विचार


देश 02 November 2026
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मप्र में संघ का महा-मंथन शुरू : संगठनात्मक ढांचे में बदलाव, डिजिटल चुनौतियों और वैश्विक संवाद समेत तमाम विषयों पर हो रहा विचार

इंदौर, 02 नवंबर। शताब्दी वर्ष में देशव्यापी संपर्क, संगठन विस्तार और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से अपनी गतिविधियों का दायरा बढ़ाने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अब आगामी वर्षों की दिशा निर्धारित करने में जुटा है। सोमवार को मध्य प्रदेश, इंदौर के डेली कॉलेज में शुरू हुई अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और सभी छह सह सरकार्यवाह सहित देशभर के करीब 408 वरिष्ठ पदाधिकारी इसमें शामिल हैं। चार नवंबर तक चलने वाले इस आयोजन में शताब्दी वर्ष के दौरान हुए कार्यों की समीक्षा के साथ संगठन की भावी संरचना, सामाजिक चुनौतियों और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर व्यापक विचार-विमर्श होगा।

उल्लेखनीय है कि, संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बैठक से पहले पत्रकारों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया था कि शताब्दी वर्ष में हुए कार्यक्रमों का उद्देश्य संगठन की पहुंच बढ़ाने के साथ समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ना रहा है। अब इन प्रयासों से मिले अनुभवों के आधार पर आगामी कार्ययोजना बनाई जाएगी। बैठक में संघ के 11 क्षेत्रों और 46 प्रांतों के प्रमुख पदाधिकारी भी शामिल हैं।

इसके साथ ही अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की इस तीन दिवसीय बैठक में देशभर से जुटे 408 वरिष्ठ पदाधिकारी बीते एक वर्ष के कार्यक्रमों, सामाजिक सहभागिता और संगठन की बढ़ती पहुंच का आकलन कर रहे हैं। 13 हजार से अधिक नई दैनिक शाखाओं, 65,660 हिंदू सम्मेलनों और 1,10,849 स्थानों तक पहुंचे संघ कार्य के अनुभवों के आधार पर अगले चरण की रणनीति तैयार होगी। संगठनात्मक पुनर्गठन से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा, नशीली दवाओं की चुनौती, डिजिटल माध्यमों पर प्रसारित सामग्री और वैश्विक परिस्थितियों तक अनेक महत्वपूर्ण विषय इस मंथन के केंद्र में हैं।

संघ के विस्तार का सबसे महत्वपूर्ण संकेत दैनिक शाखाओं की बढ़ती संख्या है। आंबेकर के अनुसार, देशभर में दैनिक शाखाओं की संख्या बढ़कर 1,01,151 हो गई है। साप्ताहिक और मासिक मिलन सहित संघ की गतिविधियां अब 1,10,849 स्थानों तक पहुंच चुकी हैं। अक्टूबर 2025 की तुलना में 13 हजार से अधिक नई दैनिक शाखाएं प्रारंभ हुई हैं।

संघ ने शताब्दी वर्ष से पहले तीन वर्षों के लिए कार्य विस्तार की योजना बनाई थी। इस दौरान नए क्षेत्रों में शाखाएं शुरू करने, स्वयंसेवकों की संख्या और सक्रियता बढ़ाने तथा समाज के विभिन्न वर्गों से संपर्क स्थापित करने पर जोर दिया गया। अब कार्यकारी मंडल में इस पूरी प्रक्रिया का मूल्यांकन होगा। किन क्षेत्रों में अपेक्षित विस्तार हुआ, कहां नए प्रयासों की जरूरत है और शाखाओं की गतिविधियों को किस तरह अधिक प्रभावी बनाया जाए, इन विषयों पर चर्चा होगी। वहीं, शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर में 65,660 हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए। इन आयोजनों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संवाद बढ़ाने का प्रयास हुआ। गृह संपर्क अभियान और सेवा कार्यों में समाज की सहभागिता भी बैठक के महत्वपूर्ण विषय हैं।

शताब्दी वर्ष के दौरान गृह संपर्क, जन गोष्ठियों और हिंदू सम्मेलनों में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही। इसी तरह विश्वविद्यालय परिसरों, ग्रामीण क्षेत्रों और शहरों में युवाओं एवं युवतियों के लिए आयोजित कार्यक्रमों में भी अच्छी सहभागिता सामने आई। अब इन अनुभवों के आधार पर महिलाओं और युवाओं के लिए नए कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाई जाएगी। युवाओं की आकांक्षाओं, देश और समाज से जुड़े उनके सवालों तथा सुझावों को आगामी गतिविधियों में स्थान देने पर विचार होगा।

इंदौर बैठक का एक महत्वपूर्ण एजेंडा संघ की संगठनात्मक रचना में प्रस्तावित परिवर्तन है। इस विषय पर पहले भी विचार-विमर्श हो चुका है। अब कार्यकारी मंडल में इसके स्वरूप और क्रियान्वयन की दिशा पर चर्चा होगी। मार्च में नागपुर में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा से पहले संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया जिला, विभाग, प्रांत और क्षेत्र स्तर पर आगे बढ़ेगी। इसी क्रम में सरकार्यवाह का निर्वाचन भी प्रस्तावित है। इस लिहाज से इंदौर का यह तीन दिनी मंथन संघ की आगामी संगठनात्मक कार्यप्रणाली के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सामाजिक समरसता, पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली, कुटुंब प्रबोधन, स्व का बोध और नागरिक कर्तव्य यानी पंच परिवर्तन के पांच विषयों को समाज तक पहुंचाने के प्रयासों की समीक्षा होगी। गृह संपर्क, सम्मेलनों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से इन विषयों पर नए अभियान चलाने की योजना बनाई जाएगी। संत रविदास की 650वीं जयंती के कार्यक्रमों और आगामी आयोजनों पर भी विचार होगा। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन प्रवास के दौरान हुए संवाद के अनुभव भी बैठक में साझा किए जाएंगे। इन प्रवासों में हिंदुत्व की अवधारणा, भारत का चिंतन और विश्व कल्याण में भारत की भूमिका जैसे विषय प्रमुख रहे। दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख लोगों से हुए संवाद को आगे बढ़ाने तथा वैश्विक संपर्क का विस्तार करने की रणनीति पर भी विचार होगा।

इससे पहले पत्रकार वार्ता में आंबेकर ने कहा था कि शताब्दी वर्ष में संघ के चिंतन का प्रमुख केंद्र हिंदुत्व क्या है, भारत क्या है, भविष्य में भारत की दिशा क्या होनी चाहिए और भ्रम उत्पन्न करने वाले तत्वों को कैसे समझा जाए, जैसे प्रश्न रहे हैं। हिंदुत्व और संघ के विचार पर पिछले सौ वर्षों से निरंतर विमर्श चल रहा है और संघ ऐसे संवाद के लिए सदैव खुला है। बैठक के अंतिम दिन 4 नवंबर को सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले पत्रकार वार्ता में विचार-विमर्श, शताब्दी वर्ष के कार्यों की समीक्षा और आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दिए जाने की संभावना है।

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