नई दिल्ली, 22 अप्रैल | रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने देश में रेलगाड़ियों के सुचारु परिचालन और रेललाइनाें के आधुनिकीकरण में ट्रैक मेंटेनरों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए बुधवार को कहा कि सरकार उनकी सुरक्षा, कार्य परिस्थितियाें एवं कल्याण काे सर्वाेच्च प्राथमिकता देगी और उन्हें पर्याप्त मात्रा में आधुनिक उपकरण, बेहतर सुविधाएं और संसाधन मुहैया कराए जाएंगे।
वैष्णव ने राजधानी के तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (एआईआरएफ) द्वारा आयोजित अखिल भारतीय ट्रैक मेंटेनर सम्मेलन में देशभर से तीन हजार से अधिक प्रतिनिधियों काे संबाेधित किया। सम्मेलन में ट्रैक मेंटेनरों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
रेल मंत्री ने कहा कि ट्रैक मेंटेनर रेलवे संचालन की रीढ़ हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कार्यस्थलों पर आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता, बेहतर सुरक्षा उपायों और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने का आश्वासन दिया। साथ ही उन्होंने ट्रैक मेंटेनर कैडर में पदोन्नति के मुद्दे पर भी ध्यान देने की बात कही।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेलवे ट्रैक का आधुनिकीकरण बहुत महत्वपूर्ण है, और हमें इस उद्देश्य को अपने पूरे जोश के साथ आगे बढ़ाना चाहिए। पिछले एक दशक में लगभग 36,000 किलोमीटर नए ट्रैक बिछाए गए हैं। वर्तमान में, इन पटरियों के बेहतर रखरखाव की सुविधा के लिए रेलवे नेटवर्क के भीतर लगभग 1,800 ट्रैक मशीनें उपलब्ध हैं; हमारा उद्देश्य इस संख्या को बढ़ाकर 3,000 के आसपास करना है। एक बार जब यह आंकड़ा 3,000 के आसपास पहुंच जाता है, तो ट्रैक निरीक्षण और रखरखाव से संबंधित लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों को काफी हद तक हल कर लिया जाएगा।
उन्हाेंने कहा, "हम ट्रैक रखरखाव के लिए एक नया मॉडल भी पेश कर रहे हैं: रेल-सह-सड़क वाहन। इस प्रणाली के तहत, कर्मचारी अपने सभी उपकरणों और उपकरणों को सीधे वाहन में लोड करने, सीधे पटरियों पर ड्राइव करने और आराम से बैठकर शारीरिक निरीक्षण करने में सक्षम होंगे। इस पहल के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट वर्तमान में भावनगर मंडल में शुरू किया जा रहा है। व्यापक परीक्षण के बाद दो रेल-सह-सड़क वाहनों को तैनात किया जाएगा। यह नई प्रणाली वर्तमान में मौजूद पारंपरिक और कठिन कार्य पद्धतियों को पूरी तरह से बदल देगी। ऑपरेशन को अब इस तरह से निष्पादित किया जा सकता है जो सुरक्षित, अधिक आरामदायक और तकनीकी रूप से उन्नत हो।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा, ट्रैक निरीक्षण में सहायता के लिए ड्रोन तकनीक और नए प्रकार के गेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ये नए गेज टर्नआउट और पॉइंट-क्रॉसिंग के सटीक माप की सुविधा प्रदान करेंगे। नतीजतन, जो कार्य पहले अनुमान के आधार पर किए गए थे, उन्हें अब पूर्ण सटीकता के साथ निष्पादित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, "आज, देश भर में आधुनिक ट्रैक सिस्टम लागू किए जा रहे हैं, जैसे 60 किलोग्राम की रेल, 90 यूटीएस क्षमता वाली रेल और 207 मीटर लंबे रेल पैनल। टर्नआउट में घर्षण-मुक्त स्विच स्थापित किए जा रहे हैं, और वेल्डेबल सीएमएस (डब्ल्यूसीएमएस) के उपयोग का विस्तार किया जा रहा है। हमारा लक्ष्य आने वाले वर्षों में पूरे देश में इन सभी आधुनिक प्रणालियों के कार्यान्वयन को सार्वभौमिक बनाना है।"
रेलवे बोर्ड के सदस्य (इंफ्रास्ट्रक्चर) विवेक कुमार गुप्ता ने सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन और नियमित निरीक्षण पर जोर देते हुए कहा कि स्टाफ की कमी, कार्य के घंटे और अन्य मानवीय पहलुओं से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक विचार किया जाएगा।
उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक राजेश कुमार पांडेय ने कहा कि सुरक्षित और सुचारु रेल संचालन में ट्रैक मेंटेनरों की भूमिका बेहद अहम है। उन्होंने आधुनिक तकनीक के उपयोग, सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत करने की जानकारी दी।
एआईआरएफ के महासचिव शिव गोपाल मिश्रा ने ट्रैक मेंटेनरों की कठिन कार्य परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उनकी प्रमुख मांगों को उठाया। उन्होंने बेहतर कार्य समय, पर्याप्त स्टाफ, आधुनिक सुरक्षा उपकरण और स्वास्थ्य सुविधाओं की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही महिला ट्रैक मेंटेनरों के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी रखी।
सम्मेलन में विभिन्न जोनों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे और ट्रैक मेंटेनरों की समस्याओं के व्यावहारिक समाधान सुझाए। अंत में यह संकल्प लिया गया कि सभी मांगों को प्राथमिकता के आधार पर संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाया जाएगा और उनके शीघ्र समाधान के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।


















