नई दिल्ली, 30 जुलाई । दिल्ली-एनसीआर में हर साल धान कटाई के मौसम के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी के लिए ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया है। आयोग ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सरकारों को निर्देश दिया है कि वे आगामी धान कटाई सीजन से पहले ड्रोन आधारित निगरानी व्यवस्था तैयार करें।
सीएक्यूएम ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि ड्रोन तेज तैनाती, उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरों और रियल-टाइम वीडियो के माध्यम से पराली जलाने की घटनाओं का पता लगाने में मदद करेंगे। इनसे जलती हुई आग, धुएं के गुबार और प्रभावित खेतों की पहचान की जा सकेगी।
ड्रोन से प्राप्त जियो-टैग्ड फोटो और वीडियो कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण सबूत के रूप में इस्तेमाल किए जा सकेंगे।
राज्यों को निर्देश दिया गया है कि ड्रोन सर्वे में धान की खेती वाले क्षेत्रों, पहले से चिह्नित हॉटस्पॉट गांवों और आग लगने की अधिक संभावना वाले इलाकों को प्राथमिकता दी जाए।
राज्यों को पहले से ड्रोन उड़ान योजनाएं तैयार करने और प्रभावित खेतों की पहचान के लिए उन्हें भू-अभिलेख से जोड़ने को कहा गया है।
सीएक्यूएम ने बताया कि ड्रोन सर्वे दिन के समय किए जाएं, लेकिन दोपहर 3 से रात 9 बजे के बीच विशेष ध्यान दिया जाए, क्योंकि इस अवधि में सैटेलाइट निगरानी से बचने के लिए पराली जलाने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
डेटा सुरक्षित रखने और निगरानी केंद्र बनाने के निर्देश
राज्यों को निर्देश दिया गया है कि ड्रोन से रिकॉर्ड किए गए सभी वीडियो को संबंधित फसल कटाई सीजन के बाद तीन महीने तक सुरक्षित रखा जाए। इसके अलावा ड्रोन निगरानी डेटा के विश्लेषण और रिपोर्टिंग के लिए केंद्रीय डैशबोर्ड बनाने को कहा गया है।
ड्रोन की लाइव फीड और रिकॉर्डिंग सीएक्यूएम को उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वास्तविक समय में निगरानी और कार्रवाई संभव हो सके।
सीएक्यूएम ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकारों से इन निर्देशों के पालन की स्थिति पर 14 अगस्त 2026 तक एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा करने को कहा है।















