सोसाइटियों में खाद की कमी, निजी दुकानों में दोगुने दाम, खरीफ सीजन में किसान बेहाल

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सोसाइटियों में खाद की कमी, निजी दुकानों में दोगुने दाम, खरीफ सीजन में किसान बेहाल

धमतरी, 18 जून । खरीफ का सीजन शुरू हो गया है और किसान खेती किसानी में व्यस्त हो चले हैं। खेती किसानी के समय में किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद और उर्वरक नहीं मिल पा रही है जिसके कारण किसान काफी परेशान हैं। किसानों के लिए प्रति एकड़ एक बोरी खाद की सीमा तय कर दी गई है जो की उचित नहीं है। इससे किसान काफी परेशान है। किसान समय पर खाद बीज उपलब्धता की मांग कर रहे हैं ताकि समय पर बुवाई का कार्य आसानी से हो सके।

सरकारी सहकारी समितियों (सोसाइटियों) में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं होने से किसानों को निजी दुकानों का रुख करना पड़ रहा है, जहां यूरिया और डीएपी जैसे उर्वरक ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि एक ओर सोसायटियों में खाद की कमी बताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर निजी दुकानों में यही खाद आसानी से उपलब्ध है, जिससे कालाबाजारी की आशंका भी जताई जा रही है।

किसानों के अनुसार इस वर्ष सोसायटियों में प्रति एकड़ केवल एक बोरी यूरिया, एक बोरी राखड़ और नैनो लिक्विड डीएपी दिया जा रहा है। वहीं तीन एकड़ भूमि वाले किसानों को दो बोरी यूरिया और दो बोरी राखड़ उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों का कहना है कि नैनो लिक्विड डीएपी पारंपरिक ठोस डीएपी का पूर्ण विकल्प नहीं है। उनका मानना है कि ठोस डीएपी फसल की बेहतर वृद्धि और अधिक उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जबकि इसकी उपलब्धता सोसायटियों में बेहद सीमित है। परिणामस्वरूप किसानों को निजी दुकानों से महंगे दामों पर डीएपी खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि शासन द्वारा सोसायटियों में यूरिया की एक बोरी 266.50 रुपये में उपलब्ध कराई जाती है, लेकिन कमी के कारण निजी दुकानों में यही यूरिया 600 से 800 रुपये प्रति बोरी तक बेचा जा रहा है। इसी प्रकार डीएपी की कीमत भी बढ़कर 2600 से 3000 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गई है। किसानों का आरोप है कि कुछ व्यापारी पहले से खाद का भंडारण कर कृत्रिम कमी पैदा कर रहे हैं और बाद में ऊंचे दामों पर बिक्री कर रहे हैं। इसके बावजूद संबंधित विभागों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने से किसानों में नाराजगी बढ़ रही है। किसान, महेश साहू, नरेश सिन्हा, गिरधर साहू का कहना है कि निजी दुकानों में डीएपी दोगुने दामों पर आसानी से उपलब्ध है। यदि सरकार किसानों की जरूरत के अनुसार सोसायटियों में डीएपी, यूरिया और अन्य उर्वरकों की पर्याप्त व्यवस्था करती, तो कालाबाजारी की स्थिति पैदा नहीं होती। किसान वेद प्रकाश साहू, खूबलाल साहू ने कहा कि हर वर्ष किसानों को मजबूरी में निजी दुकानों से महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ती है। शासन को चाहिए कि खरीफ सीजन शुरू होने से पहले मांग के अनुरूप खाद का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करे। किसानों ने प्रशासन और शासन से तत्काल हस्तक्षेप कर खाद की उपलब्धता बढ़ाने तथा कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि समय पर बुवाई और खेती के कार्य प्रभावित न हों।

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