शाजापुर, 18 जून । मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बिजली की क्या हालत है यह किसी से छिपी नहीं है। मेंटेनेंस के बाद भी कटौती का दंश देने वाली बिजली कंपनी अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रही, जिसकी कार्यप्रणाली लोगों में आक्रोश बढ़ा रही है।
मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के ग्राम खेड़ा पहाड़ के लोग भी इन दिनों बिजली कंपनी की ज्यादती का शिकार होकर अंधेरे में जीवन यापन कर रहे हैं।
कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि गांव पर 80 हजार की राशि बकाया है। जबकि ग्रामीणों का कहना है कि अधिकांश लोगों ने बिल जमा कर दिए हैं और उन पर कोई बड़ा बकाया नहीं है।
जिले के ग्राम खेड़ा पहाड़ में पिछले 15 दिनों से बिजली आपूर्ति ठप है। ट्रांसफार्मर (डीपी) जल जाने के कारण ग्रामीण भीषण गर्मी के बीच अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद बिजली कंपनी के अधिकारी उनकी सुनवाई नहीं कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के अधिकांश उपभोक्ताओं ने अपने बिजली बिल जमा कर दिए हैं और उन पर कोई बड़ा बकाया नहीं है। इसके बावजूद बिजली कंपनी 80 से 90 हजार रुपए के बकाया बिल का हवाला देकर नई डीपी नहीं लगाई जा रही है। जिसके चलते ग्रामीणों को ऐसे गर्मी और उमस के बीच अंधेरे में रात बिताना पड़ रही है। यही नहीं ग्रामीणों को अपने मोबाइल चार्ज करने के लिए भी किराया खर्च कर गांव से शहर आना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि जहां लाखों रुपए बकाया होने पर भी राजनीतिक संरक्षण के कारण तुरंत ट्रांसफार्मर बदल दिए जाते हैं, जबकि छोटे गांवों की उपेक्षा की जा रही है।
ग्रामीण दिनेश बंजारा ने हिस को बताया कि बिजली न होने से मोबाइल चार्ज करने के लिए उन्हें शहर जाना पड़ रहा है। खाना बनाने, बच्चों की पढ़ाई और अन्य दैनिक कार्यों में उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि 181 पर शिकायत दर्ज कराने के बाद भी अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। शहरवासी भी बेहाल केवल गांव ही नहीं बल्कि बिजली कंपनी की हालत शहर में भी खराब है। जहां भीषण गर्मी के मौसम में मेंटेनेंस के नाम पर लोगों को बिजली कंपनी ने तपने पर मजबूर कर दिया और दावा किया कि मानसून में परेशानी नहीं होगी, लेकिन हालत ये है कि एक हवा के झोंके में ही इनके मेंटेनेंस से जोड़े गए तार ऐसे गिरते हैं कि घंटों नहीं जुड़ते।
नगर में प्रतिदिन 10 से 15 बार बिजली गुल हो रही है। वहीं जब अधिकारियों को इस संबंधमें शिकायत करने के लिए फोन किए जाते हैं तो वे पहले तो फोन नहीं उठाते और बाद में फोन बंद कर लोगों को अपने हाल पर छोड़ देते हैं। जिसके चलते अब लोगों का कंपनी के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है।










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