मध्य पूर्व तनाव का बाजार पर असर: शेयर बाजार लुढ़का, फार्मा शेयरों पर बढ़ा दबाव


व्यापार 23 July 2026
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मध्य पूर्व तनाव का बाजार पर असर: शेयर बाजार लुढ़का, फार्मा शेयरों पर बढ़ा दबाव

भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गुरुवार को लाल निशान में हुई। सुबह 9:21 पर सेंसेक्स 208 अंक या 0.27 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 76,553 और निफ्टी 51 अंक या 0.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,941 पर था। शुरुआती कारोबार में फार्मा शेयरों में गिरावट बनी हुई है और निफ्टी फार्मा 0.81 प्रतिशत की कमजोरी के साथ कारोबार कर रहा था। इसकी वजह अमेरिकी टैरिफ के ऐलान को माना जा रहा है।

इसके अलावा सूचकांकों में निफ्टी रियल्टी, निफ्टी आईटी, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी पीएसई, निफ्टी इन्फ्रा और निफ्टी कमोडिटीज लाल निशान में थे। निफ्टी ऑटो, निफ्टी मेटल, निफ्टी मीडिया, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी डिफेंस और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स हरे निशान में थे।

सेंसेक्स पैक में ट्रेंट, एमएंडएम, एचयूएल, आईसीआईसीआई बैंक और पावर ग्रिड हरे निशान में थे। इन्फोसिस, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक, एनटीपीसी, टाटा स्टील, एसबीआई, टीसीएस, एशियन पेंट्स, एक्सिस बैंक, सन फार्मा, इटरनल, भारती एयरटेल, टाइटन, एचसीएल टेक और कोटक महिंद्रा बैंक लाल निशान में थे।

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में बिकवाली देखी जा रही है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 152 अंक या 0.25 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 62,142 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 33 अंक या 0.17 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 19,097 पर था।

वैश्विक बाजारों में मिलाजुला कारोबार हो रहा है। टोक्यो, हांगकांग, सोल और जकार्ता हरे निशान में थे। वहीं, शंघाई लाल निशान में था। अमेरिकी शेयर बाजार बुधवार के सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। डाओ जोन्स 0.01 प्रतिशत के साथ सपाट और टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक 0.57 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।

जानकारों ने कहा कि ईरान-अमेरिका संघर्ष में लाल सागर में सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हमला करके हूती विद्रोहियों की आक्रामक एंट्री ने पश्चिम एशिया के संकट को और गहरा दिया है और ब्रेंट क्रूड की कीमतों को ऊपर धकेल दिया है। ब्रेंट क्रूड का भाव 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने से भारतीय शेयर बाजार की निवेशक भावना पर असर पड़ना तय है। ऊंची कच्चे तेल की कीमतों के प्रति भारत की संवेदनशीलता से एक बार फिर व्यापक आर्थिक स्थिति चिंता का विषय बनती जा रही है।

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