काठमांडू, 23 जुलाई । दार्चुला जिले में व्यास स्थित महाकाली नदी के पूर्व की लगभग 400 किलोमीटर नेपाल के दावे वाली भूमि को लेकर
प्रतिनिधि सभा में एक संकल्प प्रस्ताव पेश गया है। प्रस्ताव में लिंपियाधुरा की गुंजी, नाबी और कुट्टी की भूमि पर सरकार का प्रशासनिक नियंत्रण सुनिश्चित करने की मांग की गई है। प्रस्ताव में इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा कराने की मांग की गई है।
यह प्रस्ताव नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के सांसद गणेश सिंह ठगुन्ना ने पेश किया है। ठगुन्ना दार्चुला-1 निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित सांसद हैं। इसी जिले के अंतर्गत कालापनी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा पड़ता है, जिस पर नेपाल लगातार अपना दावा करता रहता है। इस संकल्प प्रस्ताव में कहा गया है कि नेपाली भूमि भारतीय अतिक्रमण में है। उन्होंने प्रतिनिधि सभा नियमावली-20२६ के नियम 79 के तहत इस प्रस्ताव पर सदन में चर्चा कराने की मांग की है।
प्रस्ताव में कहा गया है कि अतिक्रमित क्षेत्र से जुड़े छाङरु और तिंकर गांवों के नागरिक सड़क संपर्क, खाद्यान्न, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से गंभीर रूप से प्रभावित हैं। प्रस्ताव के अनुसार इन गांवों के लोगों को अपने ही जिला मुख्यालय आने-जाने और दैनिक उपयोग की वस्तुएं खरीदने के लिए भी भारत के रास्ते और भारतीय बाजारों पर निर्भर रहना पड़ता है।
संकल्प प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि अतिक्रमित क्षेत्र के कुटी, गुंजी और नाबी के निवासियों को भारत सरकार आरक्षण सहित विशेष पैकेज और विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद छाङरु और तिंकर के निवासी अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए सीमा क्षेत्र में रहकर नेपाल की राष्ट्रीय संप्रभुता और स्वाभिमान की रक्षा कर रहे हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस विषय से प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद कार्यालय, वित्त मंत्रालय, अवसंरचना विकास मंत्रालय, गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय सीधे तौर पर संबंधित हैं।
नेपाल की अतिक्रमित भूमि पर प्रशासनिक नियंत्रण बहाल करने की मांग, संसद में प्रस्ताव पेश


















