नई दिल्ली, 11 अगस्त। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान उन पर लगाए गए आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि इस सबके बावजूद इतिहास पूर्व प्रधानमंत्री को सम्मान के साथ याद करेगा। उन्होंने कहा कि डॉ. सिंह के प्रधानमंत्री कार्यकाल की आर्थिक नीतियों, सामाजिक योजनाओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सोनिया गांधी ने मंगलवार को एक अंग्रेजी अखबार में लिखे लेख में डॉ. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल, आर्थिक नीतियों, सामाजिक कल्याण योजनाओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में उनके योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि डॉ. सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोपों और उन्हें बदनाम करने के प्रयासों के बावजूद उनके प्रधानमंत्री के रूप में किए गए कामों का रिकॉर्ड उनके पक्ष में है। डॉ. सिंह ने आर्थिक बदलाव के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण काम किया और उनके कार्यकाल में ऐसे कई फैसले लिए गए, जिनका असर लंबे समय तक रहा। उन्होंने डॉ. सिंह की तुलना उन नेताओं से भी की, जिनकी विरासत का मूल्यांकन तत्कालीन राजनीतिक विवादों के बजाय समय के साथ उनके काम के आधार पर किया जाता है।
सोनिया ने लेख में 29 जुलाई 2026 को हुए एक घटनाक्रम का भी जिक्र किया, जब उच्चतम न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ कोयला आवंटन घोटाले से जुड़े मामले में अपनी टिप्पणियों को लेकर सरकार के रुख पर सवाल उठाए । उन्होंने कहा कि अदालत की टिप्पणियां उस दौर की याद दिलाती हैं, जब डॉ. मनमोहन सिंह सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे थे और उनकी व्यक्तिगत ईमानदारी तथा छवि को भी राजनीतिक हमलों का सामना करना पड़ा था।
सोनिया गांधी ने कहा कि डॉ. सिंह की आर्थिक नीतियों का आकलन करते समय उनके प्रधानमंत्री बनने से पहले के दौर को भी ध्यान में रखना चाहिए। साल 2004 में जब डॉ. सिंह प्रधानमंत्री बने, तब भारतीय अर्थव्यवस्था पहले के आर्थिक सुधारों के बाद तेजी से आगे बढ़ रही थी। लेख में उन्होंने डॉ. सिंह की व्यक्तिगत कार्यशैली का भी उल्लेख किया और उन्हें शांत, विद्वान तथा सिद्धांतों पर कायम रहने वाला नेता बताया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक आरोपों और आलोचनाओं के बावजूद डॉ. सिंह ने अपनी जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित किया।
उन्होंने डॉ. सिंह सरकार की कई प्रमुख योजनाओं और नीतिगत पहलों का जिक्र किया। इनमें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), सूचना का अधिकार कानून, खाद्य सुरक्षा कानून और शिक्षा के अधिकार जैसे कदम शामिल हैं। सोनिया गांधी ने कहा कि इन पहलों ने आम नागरिकों को अधिकार और सामाजिक सुरक्षा देने के साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनकी भागीदारी को मजबूत किया।
सोनिया गांधी ने डॉ. सिंह सरकार के दौरान सूचना के अधिकार को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे शासन में पारदर्शिता बढ़ी और नागरिकों को सरकार से जवाब मांगने का अधिकार मिला। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण परिवारों को रोजगार की गारंटी दी, जबकि खाद्य सुरक्षा कानून ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों को भोजन का अधिकार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया।
उन्होंने डॉ. सिंह के कार्यकाल में शिक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़े कदमों का भी उल्लेख किया। लेख में कहा गया कि शिक्षा के अधिकार को कानूनी अधिकार का दर्जा देना, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों सहित विभिन्न वर्गों के लिए योजनाओं को आगे बढ़ाना उस सरकार की सामाजिक नीतियों का हिस्सा था।
सोनिया गांधी ने लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों के संदर्भ में भी डॉ. सिंह के कार्यकाल को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उस दौरान संसद, मीडिया और नागरिक समाज को सरकार से सवाल करने और नीतियों पर बहस करने की पर्याप्त गुंजाइश थी। उन्होंने कहा कि डॉ. सिंह की विरासत का आकलन तत्कालीन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर नहीं, बल्कि उनके फैसलों, आर्थिक नीतियों और सामाजिक क्षेत्र में किए गए कामों के आधार पर किया जाना चाहिए। समय बीतने के साथ डॉ. सिंह के प्रधानमंत्री के रूप में योगदान की तस्वीर और स्पष्ट होगी।



















