देहरादून, 14 अगस्त । उत्तराखंड में अगले चार दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने 14 से 18 अगस्त के बीच कई इलाकों में भारी बारिश, गरज-चमक और आकाशीय बिजली को लेकर चेतावनी जारी की है। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, बाढ़ और सड़क संपर्क बाधित होने की आशंका के बीच नदियों के जलस्तर पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को देहरादून, पौड़ी, पिथौरागढ़, बागेश्वर और नैनीताल में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इन क्षेत्रों में बारिश के अत्यंत तीव्र दौर के साथ आकाशीय बिजली चमकने की संभावना भी है। हरिद्वार, टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग, चंपावत और ऊधमसिंह नगर में भी कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान है।
मौसम विभाग ने 14 से 17 अगस्त के दौरान संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और चट्टान गिरने से सड़क एवं राजमार्ग बाधित होने की चेतावनी दी है। भारी बारिश से बाढ़ के कारण सड़क और पुलों के अवरुद्ध अथवा क्षतिग्रस्त होने तथा बिजली और पेयजल जैसी आवश्यक सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है। भारी बारिश के चलते बांधों और बैराजों से पानी का डिस्चार्ज बढ़ने तथा नदियों के जलस्तर में वृद्धि की संभावना को देखते हुए प्रशासन को सतर्क रहने को कहा गया है। राज्य में नदियों और जलाशयों के जलस्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है।
मौसम विभाग ने भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से भी सतर्क रहने की अपील की है। यात्रियों और वाहन चालकों को मौसम की स्थिति को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचने तथा सक्रिय भूस्खलन क्षेत्रों, उफनती नदियों और बरसाती नालों से दूर रहने की सलाह दी गई है। फिलहाल राज्य के अधिकांश हिस्सों में शुक्रवार को बादल छाए हुए हैं और कई स्थानों पर बारिश हो रही है।
72 मार्ग बाधित
बारिश का असर राज्य के सड़क नेटवर्क पर भी दिखाई दे रहा है। दैनिक आपदा रिपोर्ट के अनुसार राज्य में कुल 72 मार्ग बंद हैं। इनमें चमोली के 11, नैनीताल के आठ, बागेश्वर के सात, पिथौरागढ़ के 13 और रुद्रप्रयाग के चार मार्ग शामिल हैं। प्रशासन और संबंधित विभाग बंद मार्गों को खोलने के लिए आवश्यक कार्रवाई कर रहे हैं।
कई नदियां चेतावनी स्तर के करीब
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (यूएसडीएमए) की शुक्रवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार सुबह आठ बजे उत्तरकाशी में भागीरथी का जलस्तर 1120.45 मीटर रहा। यहां चेतावनी स्तर 1122 और खतरे का स्तर 1123 मीटर है। टिहरी के कोटेश्वर में जलस्तर 541.56 मीटर तथा देवप्रयाग में 459.80 मीटर दर्ज किया गया। अलकनंदा नदी का रुद्रप्रयाग में जलस्तर 624.90 मीटर दर्ज हुआ, जबकि चेतावनी स्तर 626 और खतरे का स्तर 627 मीटर है। जोशीमठ में जलस्तर 1376 मीटर रहा। मंदाकिनी नदी का रुद्रप्रयाग में जलस्तर 624 मीटर दर्ज किया गया, जो 625 मीटर के चेतावनी स्तर से नीचे है।
गंगा का हरिद्वार में जलस्तर 291.80 मीटर रहा। यहां चेतावनी स्तर 293 और खतरे का स्तर 294 मीटर है। ऋषिकेश में जलस्तर 333.80 मीटर दर्ज किया गया। यमुना का डाकपत्थर में जलस्तर 455.51 मीटर रहा, जबकि यहां खतरे का स्तर 456 मीटर निर्धारित है। डाकपत्थर में 23,707 क्यूसेक डिस्चार्ज दर्ज किया गया।
जलाशयों और बैराजों की स्थिति के अनुसार इछाड़ी में 644.30 मीटर जलस्तर के साथ 14,687.03 क्यूसेक तथा आसन बैराज में 400.80 मीटर जलस्तर के साथ 8,000 क्यूसेक डिस्चार्ज दर्ज किया गया।
केंद्रीय जल आयोग से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर श्रीनगर, ऋषिकेश, हरिद्वार और रामनगर को बाढ़ पूर्वानुमान स्थलों के रूप में चिह्नित किया गया है। संबंधित अधिकारियों को जलस्तर की लगातार निगरानी और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
उत्तराखंड में अगले चार दिन भारी बारिश का अलर्ट, भूस्खलन-बाढ़ का खतरा















