वैज्ञानिकों को ओरल कैंसर से निपटने के लिए जेनेटिक मिले सुराग


विज्ञान 06 December 2025
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वैज्ञानिकों को ओरल कैंसर से निपटने के लिए जेनेटिक मिले सुराग

नई दिल्ली: भारतीय साइंटिस्ट्स की एक टीम ने देश के दक्षिणी हिस्सों में महिला मरीज़ों में ओरल कैंसर पैदा करने वाले ड्राइवर जीन म्यूटेशन का पता लगाया है। जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR), बेंगलुरु और BRIC-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जीनोमिक्स (NIBMG), कल्याणी की टीम ने श्री देवराज उर्स एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च (SDUAHER), कोलार के डॉक्टरों के साथ मिलकर भारत में ओरल कैंसर पर एक महिला-केंद्रित स्टडी की, जिसमें तंबाकू चबाने की एक अनोखी आदत थी।

JNCASR, बेंगलुरु के प्रोफेसर तपस के कुंडू की लीडरशिप में की गई इस स्टडी का मकसद यह समझना था कि महिलाओं में कैंसर को क्या खास बनाता है, यह बीमारी महिला मरीज़ों में कैसे दिखती है और बढ़ती है और हम उनका बेहतर इलाज कैसे कर सकते हैं। टीम ने ट्यूमर टिशू को डिजिटली एनालाइज़ करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (डीप लर्निंग) का भी इस्तेमाल किया। इससे महिला मरीज़ों के दो अलग-अलग ग्रुप सामने आए, जिनमें से हर एक के ट्यूमर में अलग-अलग इम्यून रिस्पॉन्स था। भारत दुनिया में ओरल कैंसर के सबसे ज़्यादा मामलों वाले देशों में से एक है। कुछ इलाकों, खासकर दक्षिणी और उत्तर-पूर्वी भारत में महिलाओं में इसके मामले बहुत ज़्यादा देखे गए हैं। इसकी वजह तंबाकू वाले पान, गुटखा और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स चबाने की आम आदत है। हालांकि पुरुषों में इस बीमारी पर बड़े पैमाने पर स्टडी की गई है, लेकिन महिलाओं में होने वाले ओरल कैंसर पर अक्सर ध्यान नहीं दिया गया है।

यह स्टडी OSCC-GB की महिला मरीज़ों के ट्यूमर और ब्लड सैंपल पर की गई थी, जिन्हें एक खास रीजनल तंबाकू चबाने की आदत (कड्डीपुडी) थी, जो आमतौर पर कर्नाटक के कोलार ज़िले की महिलाओं में देखी जाती है। महिलाओं पर केंद्रित इस ग्रुप के एनालिसिस से ओरल ट्यूमर बनने में शामिल एक खास ड्राइवर म्यूटेशन का पता चला है। क्लिनिकल एंड ट्रांसलेशनल मेडिसिन जर्नल में छपी यह जांच खास तौर पर भारतीय महिलाओं को प्रभावित करने वाले ओरल कैंसर के बहुत ज़्यादा खतरनाक, बहुत ज़्यादा बार-बार होने वाले और जानलेवा रूपों की बायोलॉजिकल वजहों का पता लगाने के लिए डिज़ाइन की गई थी। लेटेस्ट होल-एक्सोम सीक्वेंसिंग का इस्तेमाल करके, रिसर्चर्स ने कर्नाटक के कोलार में महिला ओरल कैंसर ग्रुप में बड़े म्यूटेशन वाले दस खास जीन की पहचान की। हालांकि, इन मरीज़ों में दो बड़े जीन, CASP8 और TP53, बहुत ज़्यादा म्यूटेटेड पाए गए, लेकिन खास तौर पर, CASP8 ही ड्राइवर म्यूटेशन (कैंसर पैदा करने वाला) लगता है, जो ओरल कैंसर के मरीज़ों (ज़्यादातर पुरुषों) में पहले स्टडी किए गए म्यूटेशन से काफी अलग है। नतीजों से पता चलता है कि एक साथ होने वाले TP53 और CASP8 म्यूटेशन ओरल कैंसर में बहुत ज़्यादा खतरनाक और जानलेवा फीनोटाइप देते हैं। टीम अब रिसर्च के अगले फेज़ के लिए TP53 में बदलाव के बैकग्राउंड में इस नए ड्राइवर म्यूटेशन से होने वाले ऑन्कोजेनेसिस के मॉलिक्यूलर मैकेनिज्म को समझने पर फोकस कर रही है।

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