शिमला, 25 अप्रैल । पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा है कि भारत में जिस भावना के साथ दलबदल कानून बनाया गया था, वह अपने उद्देश्य को पूरा करने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है। उन्होंने वर्तमान कानून की खामियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि आज की व्यवस्था ऐसी है जिसमें यदि कोई व्यक्ति अकेले चोरी करता है तो उसे सजा मिलती है, लेकिन यदि पूरा समूह मिलकर घर लूट ले तो उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी के राज्यसभा के सात सांसदों के मामले में दलबदल के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होना इस कानून की कमजोरियों को दर्शाता है।
शांता कुमार ने शनिवार को एक बयान में देश की राजनीति के गिरते स्तर पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पहले राजनीति सेवा, ईमानदारी और राष्ट्रहित के लिए की जाती थी, लेकिन आज यह केवल सत्ता और कुर्सी तक सीमित होकर रह गई है।
उन्होंने कहा कि गुलाम भारत के समय राजनीति पूरी तरह देश के लिए समर्पित थी। भगत सिंह जैसे हजारों देशभक्तों ने मातृभूमि की सेवा के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण न्यौछावर कर दिए, लेकिन आज़ाद भारत में राजनीति का केंद्र बिंदु राष्ट्रहित की बजाय व्यक्तिगत और राजनीतिक स्वार्थ बन गया है।
उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से आग्रह किया कि दलबदल कानून पर पुनर्विचार किया जाए और ऐसे प्रावधान लाए जाएं जो सामूहिक दलबदल को भी स्पष्ट रूप से दंडनीय बनाएं।

















