बच्चों का मन थक चुका है और यह थकान उनके व्यवहार में दिखती है। उनके बाल मन से गुस्सा और चिड़चिड़ापन दूर रखने के लिए योग का सहारा लें। योग उनके लिए किसी संस्कार की तरह ही जरूरी है। योग से बच्चा सांस, संतुलन और स्थिरता को अपनाता है। ये तीनों मिलकर बच्चों के भीतर वह ठहराव पैदा करते हैं, जो आज की तेज दुनिया ने उनसे छीन लिया है। नियमित योग बच्चों को प्रतिक्रिया देने से पहले सोचने की आदत सिखाता है। आइए जानते हैं बच्चों के गुस्से और चिड़चिड़ेपन व दबाव को कम करने के लिए कौन से योगासन का अभ्यास कर सकते हैं।
बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग का असर :
ताड़ासन और वृक्षासन: ताड़ासन और वृक्षासन योगासन बच्चे को एकाग्रता और संतुलन सिखाते हैं। इन आसनों से शरीर स्थिर होता है और मन का भटकाव कम होता है। पढ़ाई में ध्यान बढ़ता है और बेचैनी घटती है।
भुजंगासन: इस आसन से दबा हुआ तनाव बाहर निकालता है। इससे सीने का विस्तार होता है, सांस गहरी होती है। गुस्सा और घबराहट धीरे-धीरे कम होने लगती है। बालासन: बालासन का अभ्यास चिड़चिड़े मन को शांति देता है। यह आसन बच्चों के नर्वस सिस्टम को शांत करता है और भावनात्मक संतुलन लाता है।
अनुलोम-विलोम और भ्रामरी: अनुलोम विलोम और भ्रामरी प्राणायाम गुस्से पर सीधा असर डालते हैं। सांस पर काम करने से बच्चों का मूड संतुलित होता है, नींद बेहतर आती है और चिल्लाने की आदत घटती है।











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