भोपाल, 30 जनवरी। अर्चना प्रकाशन न्यास द्वारा अपने सूत्रधार एवं स्मृतिशेष विचारक शरदचंद्र मेहरोत्रा की पुण्यतिथि के अवसर पर प्रतिवर्ष आयोजित किए जाने वाले “शरद स्मृति व्याख्यान” का आयोजन आज शुक्रवार सायं पांच बजे किया जाएगा। कार्यक्रम मानस भवन, श्यामला हिल्स, भोपाल में आयोजित होगा, जिसमें शहर सहित प्रदेशभर के प्रबुद्धजन सहभागिता करेंगे।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह-प्रचारक प्रमुख अरुण जैन मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मध्यभारत प्रांत के प्रांत संघचालक अशोक पाण्डेय करेंगे। दोनों ही वक्ता अपने-अपने अनुभवों और वैचारिक दृष्टि से समसामयिक विषयों पर प्रकाश डालेंगे, जिससे यह आयोजन केवल स्मरण तक सीमित न रहकर बौद्धिक संवाद का प्रभावी मंच बनेगा।
उल्लेखनीय है कि “शरद स्मृति व्याख्यान” स्वर्गीय शरदचंद्र मेहरोत्रा के वैचारिक अवदान को स्मरण करने और उनके द्वारा स्थापित वैचारिक परंपरा को आगे बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम है। शरदचंद्र मेहरोत्रा एक कुशल संगठनकर्ता होने के साथ ही वैचारिक स्पष्टता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रबोध के संवाहक भी थे। अर्चना प्रकाशन न्यास द्वारा उनके विचारों को समाज में जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष इस व्याख्यान का आयोजन किया जाता है।
कार्यक्रम में भोपाल के साहित्यकार, लेखक, शिक्षाविद्, शोधार्थी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विभिन्न संगठनों से जुड़े गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहेंगे। अर्चना प्रकाशन न्यास ने भोपाल एवं आसपास के समस्त नागरिकों से समय पर उपस्थित होकर इस वैचारिक आयोजन का हिस्सा बनने का आग्रह किया है।
तीन पुस्तकों और स्मारिका का होगा लोकार्पण
“शरद स्मृति व्याख्यान” के दौरान अर्चना प्रकाशन न्यास की वार्षिक स्मारिका “शताब्दी के निहितार्थ” का भी विमोचन किया जाएगा। इस स्मारिका का संपादन वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. उमेश कुमार सिंह द्वारा किया गया है, जिसमें समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक विषयों पर गंभीर लेख संकलित हैं।
इसके साथ ही न्यास द्वारा इस माह प्रकाशित तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों का भी लोकार्पण किया जाएगा। इनमें डॉ. विकास दवे की पुस्तक “भारत का जय घोष – वंदे मातरम्”, लाजपत आहूजा की “धर्म की ढाल – गुरु गोविंद बहादुर” तथा रमेश शर्मा द्वारा लिखित “भगवान बिरसा मुंडा” शामिल हैं। ये पुस्तकें भारतीय राष्ट्रबोध, सांस्कृतिक चेतना और इतिहास के महान व्यक्तित्वों के संघर्ष व योगदान को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करती हैं।










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