संविधान से सशक्त भारत: 77वां गणतंत्र दिवस


देश 26 January 2026
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संविधान से सशक्त भारत: 77वां गणतंत्र दिवस

आज भारत पूरे गौरव और उत्साह के साथ अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। राजधानी नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य समारोह की अगुवाई राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु कर रही हैं। इस अवसर को अंतरराष्ट्रीय महत्व प्रदान करते हुए इस वर्ष यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन समारोह के मुख्य अतिथि हैं। यह वर्ष इसलिए भी खास है क्योंकि राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं, जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रप्रेम की भावना का प्रतीक रहा है।

भारत में हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। यह दिन 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान के लागू होने की याद दिलाता है, जब भारत को एक संप्रभु, लोकतांत्रिक और गणराज्य के रूप में औपचारिक पहचान मिली। हालांकि देश को स्वतंत्रता 15 अगस्त 1947 को प्राप्त हो गई थी, लेकिन उस समय तक भारत का अपना संविधान लागू नहीं हुआ था। संविधान के लागू होने के साथ ही देश को एक स्पष्ट लोकतांत्रिक ढांचा और नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हुए।

भारतीय संविधान का निर्माण 26 नवंबर 1949 को पूरा हो गया था, लेकिन इसे लागू करने के लिए 26 जनवरी 1950 की तारीख चुनी गई। इसके पीछे ऐतिहासिक कारण यह था कि 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी। उसी ऐतिहासिक दिन की स्मृति को सम्मान देने के उद्देश्य से संविधान को 26 जनवरी को लागू किया गया और यह दिन भारत के गणतंत्र दिवस के रूप में स्थापित हो गया।

सरल शब्दों में कहें तो गणतंत्र का अर्थ है जनता का शासन। ‘गण’ का अर्थ जनता और ‘तंत्र’ का अर्थ व्यवस्था होता है। गणतंत्र प्रणाली में सत्ता किसी राजा या वंश के हाथ में नहीं होती, बल्कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के माध्यम से देश का शासन चलता है। राजतंत्र में राज्य को राजा की संपत्ति माना जाता है, जबकि गणतंत्र में राज्य जनता का होता है। भारत में राष्ट्रपति देश का संवैधानिक प्रमुख होता है, लेकिन वह भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुना जाता है।

गणतंत्र की आधारशिला संविधान पर टिकी होती है। भारतीय संविधान नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व जैसे मौलिक मूल्य प्रदान करता है और उनके अधिकारों की रक्षा करता है। यही कारण है कि गणतंत्र प्रणाली को संविधान-केंद्रित व्यवस्था कहा जाता है। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के साथ ही प्रत्येक भारतीय नागरिक को नई पहचान, समान अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्य प्राप्त हुए।

गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं है, बल्कि यह दिन देश की जनता की शक्ति और लोकतंत्र की महत्ता को दर्शाता है। यह अवसर हमें अपने संविधान के प्रति सम्मान बनाए रखने, नागरिक कर्तव्यों का पालन करने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने की प्रेरणा देता है। आज जब भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, यह न केवल अतीत पर गर्व करने का क्षण है, बल्कि एक सशक्त, समतामूलक और लोकतांत्रिक भारत के निर्माण के लिए भविष्य की जिम्मेदारियों को समझने का भी अवसर है।

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