भारत के विकसित भारत विज़न की दिशा में आगे बढ़ते हुए रियल एस्टेट सेक्टर देश की आर्थिक वृद्धि, उत्पादकता और रोजगार सृजन का एक प्रमुख स्तंभ बनकर उभर रहा है। यह सेक्टर शहरी विकास को गति देने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर रोजगार और पूंजी निर्माण में भी अहम भूमिका निभा रहा है। FICCI-KPMG की “Reimagining India’s Real Estate Landscape” रिपोर्ट के 19वें संस्करण के अनुसार, भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर 2025 में लगभग 650 बिलियन डॉलर का बाजार बन चुका है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि यह सेक्टर 2047 तक 5.8 ट्रिलियन डॉलर से अधिक तक पहुंचने की क्षमता रखता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि रियल एस्टेट सेक्टर भारत की GDP में लगभग 7.3 प्रतिशत का योगदान देता है, जो इसे देश की अर्थव्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक बनाता है। इस सेक्टर में निवेश और संरचनात्मक बदलावों के चलते REITs और InvITs के माध्यम से अब तक 16 बिलियन डॉलर से अधिक की पूंजी अनलॉक की जा चुकी है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि बाजार अब पारंपरिक निजी स्वामित्व मॉडल से हटकर संस्थागत रूप से प्रबंधित और अधिक पारदर्शी निवेश प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में विदेशी कंपनियों ने भारत के टॉप-9 शहरों में रिकॉर्ड 9.1 मिलियन वर्ग फुट ऑफिस स्पेस लीज पर लिया। यह वृद्धि REITs के विस्तार, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) में बढ़ती गतिविधियों और फ्लेक्सिबल वर्कप्लेस मॉडल के तेजी से अपनाने के कारण हुई है। इसके अलावा, रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग पर भी जोर दिया गया है। भारत के कॉर्पोरेट रियल एस्टेट सेक्टर में AI अपनाने की दर 2023 में 5 प्रतिशत से भी कम थी, जो 2025 तक बढ़कर 91 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह बदलाव बेहद तेज गति से हुआ है और सेक्टर में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक, निवेश और नीति सुधारों के संयोजन से भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होगा तथा वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बन सकता है|



















