धमतरी, 08 मई। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और किसानों को परंपरागत खेती के साथ आय के नए अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले में संचालित सिल्क समग्र-2 योजना अब ग्रामीणों के लिए आत्मनिर्भरता का नया आधार बनती जा रही है।
केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत धमतरी जिले में शहतूत खेती, कृमिपालन और धागाकरण गतिविधियों से किसानों एवं महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगा है।
जिले में अब तक 37 किसानों का चयन कर शहतूत पौधरोपण कराया जा चुका है। योजना विशेष रूप से लघु एवं सीमांत किसानों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। जिन किसानों के पास 5 एकड़ से कम कृषि भूमि है, वे अपनी एक एकड़ भूमि में शहतूत की खेती कर कृमिपालन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार किसान वर्ष में 5 से 6 बार कृमिपालन कर प्रत्येक चक्र में 30 से 40 हजार रुपये तक की आय प्राप्त कर सकते हैं। खर्चों की कटौती के बाद प्रतिवर्ष लगभग एक से 1.5 लाख रुपये तक की शुद्ध आय संभव बताई गई है। योजना के तहत किसानों को पौधरोपण एवं सिंचाई के लिए 60-60 हजार रुपये, कृमिपालन गृह निर्माण हेतु तीन लाख 25 हजार रुपये तथा उपकरण और सामग्री के लिए 55 हजार रुपये तक की सहायता दी जा रही है। प्रति हितग्राही लगभग पांच लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिसमें 80 प्रतिशत राशि केंद्र और 20 प्रतिशत राशि राज्य सरकार वहन कर रही है।
रेशम विभाग किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण, वैज्ञानिक पद्धति से कृमिपालन की जानकारी और आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध करा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर विकसित हो रहे हैं और युवा वर्ग भी इस व्यवसाय की ओर आकर्षित हो रहा है। जिले के शासकीय टसर विकास केंद्र बिरेझर में टसर कृमिपालन भी ग्रामीणों की आजीविका का मजबूत माध्यम बनकर उभरा है। यहां 20 से अधिक हितग्राही इस कार्य से जुड़े हैं और प्रतिवर्ष लगभग 50 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। वहीं टसर कोसा घीचा धागाकरण कार्य से जुड़ी करीब 15 महिलाएं प्रतिमाह लगभग 12 हजार रुपये तक की आय प्राप्त कर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि सिल्क समग्र-2 योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि अधिक से अधिक किसानों, महिला समूहों और युवाओं को योजना से जोड़कर रोजगार और आय के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं। जिले में योजना के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। किसानों, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों के लिए यह योजना रोजगार, आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि का नया माध्यम बनकर उभर रही है।


















