राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को रोमानिया की बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज से मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने के बाद कहा कि शिक्षा उनके जीवन में परिवर्तन लाने वाली सबसे बड़ी शक्ति रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज में समान अवसर प्रदान करने का सबसे प्रभावी माध्यम है और यह व्यक्ति की पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि उसकी मेहनत और आगे बढ़ने की इच्छा को महत्व देती है।
शिक्षा ने बदली मेरे जीवन की दिशा
राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनका जन्म एक छोटे से गांव में सीमित संसाधनों वाले परिवार में हुआ था। वह अपने गांव से कॉलेज जाने वाली पहली लड़की थीं। उन्होंने कहा, “इस अनुभव ने मुझे किसी भी किताब से अधिक यह सिखाया कि शिक्षा सबसे बड़ा बराबरी का माध्यम है। यह नहीं पूछती कि आपका जन्म कहां हुआ है, बल्कि यह देखती है कि आप कितनी दूर तक जाने की कोशिश करते हैं।”
मानद डॉक्टरेट को बताया भारत-रोमानिया मित्रता का प्रतीक
राष्ट्रपति मुर्मु को शिक्षा, जनसेवा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए विश्वविद्यालय के सर्वोच्च शैक्षणिक सम्मान, मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया। उन्होंने विश्वविद्यालय के रेक्टर, सीनेट और पूरे शैक्षणिक समुदाय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह यह सम्मान 1.4 अरब भारतीयों की ओर से विनम्रतापूर्वक स्वीकार कर रही हैं। उन्होंने इसे भारत और रोमानिया के लोगों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों का प्रतीक बताया।
शिक्षक जीवन की यादें कीं साझा
राष्ट्रपति ने अपने शिक्षक के रूप में बिताए समय को याद करते हुए कहा कि एक साधारण-सी कक्षा भी किसी परिवार और पूरे समुदाय का भविष्य बदलने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का प्रभाव केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका सकारात्मक असर पूरे समाज पर पड़ता है।
एआई के दौर में नैतिकता पर दिया जोर
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आज जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और विज्ञान तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, तब विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि ज्ञान के साथ-साथ समझदारी, नैतिकता और इंसानियत को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए, ताकि तकनीकी प्रगति मानव कल्याण के लिए उपयोगी साबित हो।

















