नई दिल्ली 17 अगस्त: देश के किसानों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। सरकार किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) से मिलने वाले कृषि ऋण पर दी जाने वाली ब्याज सब्सिडी में कटौती पर विचार कर रही है। अगर यह फैसला लागू होता है तो किसानों को सस्ते कर्ज की सुविधा पर थोड़ा अधिक ब्याज चुकाना पड़ सकता है। सरकार और बैंकों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है।
किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत किसानों को खेती से जुड़े खर्चों के लिए कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। मौजूदा व्यवस्था में सरकार बैंकों को ब्याज सब्सिडी देती है, जिससे किसानों को कम दर पर कर्ज मिल पाता है। समय पर ऋण चुकाने वाले किसानों को अतिरिक्त ब्याज लाभ भी मिलता है।
50 बेसिस प्वाइंट तक कटौती पर विचार रिपोर्ट के अनुसार सरकार KCC लोन पर मिलने वाली ब्याज सब्सिडी में करीब 50 बेसिस प्वाइंट यानी 0.50 प्रतिशत तक कटौती पर विचार कर रही है। सरकार का तर्क है कि हाल के समय में नीतिगत ब्याज दरों में बदलाव हुआ है, इसलिए सब्सिडी व्यवस्था को नए हालात के अनुसार समायोजित करने की जरूरत है। हालांकि अभी यह केवल विचार-विमर्श के स्तर पर है और अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। यदि सब्सिडी कम होती है तो इसका असर किसानों की ऋण लागत पर पड़ सकता है।
कितना बढ़ सकता है किसानों पर बोझ? मान लीजिए किसी किसान ने KCC के जरिए खेती के लिए ऋण लिया है और ब्याज सब्सिडी में कमी होती है, तो बैंक की ओर से वसूली जाने वाली प्रभावी ब्याज दर में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह अतिरिक्त खर्च चिंता का कारण बन सकता है, क्योंकि खेती में पहले से ही बीज, खाद, डीजल और मजदूरी जैसी लागत लगातार बढ़ रही है। हालांकि सरकार की ओर से किसानों को समय पर भुगतान करने पर मिलने वाला लाभ जारी रहने की संभावना है। इससे नियमित रूप से ऋण चुकाने वाले किसानों को कुछ राहत मिल सकती है।
KCC योजना से जुड़े हैं करोड़ों किसान किसान क्रेडिट कार्ड योजना किसानों को आसान और समय पर कृषि ऋण उपलब्ध कराने की प्रमुख योजनाओं में शामिल है। इसके जरिए किसान फसल उत्पादन, कृषि उपकरणों और अन्य खेती से जुड़े कामों के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त करते हैं। देश में करोड़ों किसान इस योजना से जुड़े हुए हैं। सरकार का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में कर्ज की उपलब्धता बनाए रखना है, लेकिन दूसरी ओर सब्सिडी खर्च को नियंत्रित करने की चुनौती भी है। इसी वजह से ब्याज सब्सिडी की समीक्षा की जा रही है।
किसानों की नजर सरकार के फैसले पर कृषि संगठनों और किसानों की नजर अब सरकार के अंतिम निर्णय पर है। किसान संगठनों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, ऐसे समय में ब्याज सब्सिडी कम करने से किसानों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं सरकार का मानना है कि ब्याज दरों और आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव के अनुसार योजनाओं में समय-समय पर सुधार जरूरी होता है। फिलहाल किसानों को अंतिम निर्णय का इंतजार है। यदि ब्याज सब्सिडी में कटौती लागू होती है तो आने वाले समय में KCC लोन लेने वाले किसानों के खर्च में कुछ बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।



















