पेरिस, 08 मई । फ्रेंच ओपन 2026 की इनामी राशि को लेकर खिलाड़ियों और आयोजकों के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। खिलाड़ियों का कहना है कि टूर्नामेंट की कमाई में उन्हें उचित हिस्सा नहीं दिया जा रहा, जिसके चलते अब बहिष्कार तक की बात सामने आने लगी है।
विश्व नंबर एक यानिक सिनर ने गुरुवार को साफ कहा कि खिलाड़ी खुद को सम्मानित महसूस नहीं कर रहे हैं और यदि इनामी राशि में बढ़ोतरी नहीं हुई तो फ्रेंच ओपन के बहिष्कार पर विचार किया जा सकता है।
महिला टेनिस स्टार आर्यना सबालेंका ने मंगलवार को खिलाड़ियों के पक्ष में खुलकर समर्थन जताते हुए कहा था कि खिलाड़ियों को टूर्नामेंट की कुल कमाई का 15 प्रतिशत से भी कम हिस्सा मिल रहा है, जबकि उनकी मांग 22 प्रतिशत हिस्सेदारी की है।
मौजूदा रोलां गैरों चैंपियन कोको गॉफ ने भी खिलाड़ियों के रुख का समर्थन किया। खिलाड़ियों का मानना है कि टेनिस जैसे बड़े खेल में उनकी मेहनत के मुकाबले आर्थिक हिस्सेदारी काफी कम है।
विवाद तब और बढ़ गया जब फ्रेंच ओपन आयोजकों ने कुल इनामी राशि में 9.5 प्रतिशत बढ़ोतरी की घोषणा करते हुए इसे 6 करोड़ 17 लाख यूरो कर दिया। हालांकि खिलाड़ियों ने कहा कि इससे वास्तविक समस्या हल नहीं होती।
खिलाड़ियों की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया, “टूर्नामेंट की कुल आय में खिलाड़ियों की हिस्सेदारी 2024 में 15.5 प्रतिशत थी, जो 2026 में घटकर अनुमानित 14.9 प्रतिशत रह जाएगी।”
दिग्गज खिलाड़ी नोवाक जोकोविच ने भी इस मुद्दे पर खुलकर खिलाड़ियों का समर्थन किया और खासतौर पर सबालेंका की तारीफ की।
जोकोविच ने कहा, “मुझे खुशी है कि हमारे खेल के बड़े खिलाड़ी आगे आकर टेनिस की राजनीति और उसकी बारीकियों को समझ रहे हैं। सबालेंका सिर्फ अपने फायदे के लिए नहीं, बल्कि सभी खिलाड़ियों के हित के लिए आवाज उठा रही हैं।”
उन्होंने कहा, “मेरे लिए यही असली नेतृत्व है। मुझे उम्मीद है कि वह इसी तरह खिलाड़ियों की आवाज उठाती रहेंगी। मैं उनके इस कदम को सलाम करता हूं।”
जोकोविच लंबे समय से खिलाड़ियों के अधिकारों को लेकर मुखर रहे हैं। वह प्रोफेशनल टेनिस प्लेयर्स एसोसिएशन (पीटीपीए) के संस्थापकों में शामिल हैं।
पीटीपीए का मानना है कि फ्रेंच ओपन इनामी राशि विवाद यह साबित करता है कि टेनिस व्यवस्था में बड़े सुधार की जरूरत है।


















