नई दिल्ली, 18 अगस्त । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज प्रातः हमेशा की तरह एक प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक (सुभाषितम्) के माध्यम से कहा कि सभी को हमेशा आत्मसम्मान और स्वाभिमान के साथ जीना चाहिए। उन्होंने कहा कि सच्चा पुरुषार्थ और पराक्रम इसी में निहित है। प्रधानमंत्री ने कहा कि व्यक्ति को किसी भी हाल में सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए।
''उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम्। अप्यपर्वणि भज्येत न नमत्वेव कस्यचित्॥ यह प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक महाभारत के उद्योग पर्व से लिया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे आज अपने एक्स हैंडल पर साझा किया है।
इसका अर्थ है, "मनुष्य को सदैव आत्मसम्मान, साहस और स्वाभिमान के साथ जीवन जीना चाहिए। सच्चा पुरुषार्थ और पराक्रम इसी में है कि व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता न करे, बल्कि सत्य, धैर्य और आत्मगौरव के साथ अपना आदर्शों पर दृढ़ रहे।"

















